Wednesday, May 12, 2010
Wednesday, February 18, 2009
=ग़ज़ल=
मुक़द्दस लिबास पहने हुए मकान में हूँ!
ए ज़मीन! अब में तेरी अमान में हूँ!
ज़िन्दगी महफिलों में खर्च कर दी हमने,
अब आज मैं इस बियाबान में हूँ!
अब हिंदू - मुसलमान की बातें रहने भी दो,
ये ही बहुत है की मैं इंसान में हूँ!
माथे पे शिकन, न आंखों में कोई खौफ है,
मुझे फख्र है, की मैं हिंदुस्तान में हूँ!
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= चंद अशआर=
शहर में शेर की मांद कहाँ से लाऊं!
बेटा! ज़मीं पे चाँद कहाँ से लाऊं!
मेहनत और इमानदारी के पैसों में,
अम्मा! कोरमा - नांद कहाँ से लाऊं!
***
तख्ती हमारे नाम की अब दर से हटा दी!
चादर कोई पुरानी थी, बिस्तर से हटा दी!
बच्चों ने नए ढंग से कमरों को सजाया,
तस्वीर भी हमारी अब इस घर से हटा दी!
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वो जुबां की तल्खियां पसंद नहीं करते!
समंदर भी टूटी कश्तियाँ पसंद नही करते!
जो ऊँची-ऊँची इमारतें बनते हैं वो,
हमारी गरीब बस्तियां पसंद नहीं करते!
हवा भी पाबन्द-ऐ-वफ़ा नहीं इसलिए,
अब फूल भी तितलियाँ पसंद नहीं करते!
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Friday, February 6, 2009
Monday, January 26, 2009
=ग़ज़ल=
ग़ज़ल बनकर वो मेरे जेहन में आए थे कभी!
खुशियों भरी सौगात वो लाये थे कभी!
ज्यों-ज्यों वक्त गुज़रता गया वो दूर होते गए,
जैसे ज़िन्दगी में नज़र न आए थे कभी!
बुरा वक्त आया तो यारों ने साथ छोड़ दिया,
संग अब वो नहीं, जो साथ साये थे कभी!
गम ज़िन्दगी में उन्ही से ज्यादा मिला है,
जो लबों पे तबस्सुम लाये थे कभी!
शिकायत करूँ तो क्या, उसकी आवारगी की,
हम भी तो आवारा-दिल कहलाये थे कभी!
बनाया था जिन्होंने नशेमन 'दिल' का,
नशेमन पे कहर वो ढाये थे कभी!
=दिलशेर 'दिल' दतिया
=ग़ज़ल=
मेरे दिल की दुनिया लुटाने से पहले!
चला आए कोई, बुलाने से पहले!
ज़मीं ओढ़ लूँगा, अगर वो न आया,
वो आजाये हस्ती, मिटाने से पहले!
न देखा, न जाना, न उससे मिला हूँ,
वो मिल जाए ख़ुद को, भुलाने से पहले!
जो हो सामने तो, ग़ज़ल मैं कहूँगा,
न जाए ग़ज़ल वो सुनाने से पहले!
कई ख़त लिखे हैं, तसव्वुर में 'दिल' के,
वो आ जाए हर ख़त, जलाने से पहले!
=दिलशेर 'दिल' दतिया
Thursday, January 22, 2009

नाम : दिलशेर 'दिल'
जन्मतिथि : 12 जून 1980
शिक्षा : एम. ए. (उर्दू)
पता : गोंडा मोहल्ला, नाजियाई बाज़ार, दतिया (म.प्र।)
मोबाइल : ९९२६२९६४३४
पिता का नाम : श्री शेर बहादुर खान
माता का नाम : श्रीमती रशीदा
व्यवसाय : कंप्यूटर एक्जीक्यूटिव
प्रकाशन : 1- इंतिज़ार (ग़ज़ल संग्रह)=2003, 2- सहरा (ग़ज़ल संग्रह)=2007
सम्मान : "दतिया गौरव" म. प्र. शासन द्वारा (2005),
लेखन : पिछले लगभग 15-16 सालों से ग़ज़ल, कहानी, कविताओं का लेखन व विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन

